बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता
मुंबई, 25 अगस्त। राज्य के आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनदा माताओं को दिए जाने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे (Aditi Tatkare) ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को पोषण आहार की कड़ाई से जांच करने के निर्देश दिए हैं। इससे साफ है कि सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़े पोषण आहार की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
योजनाओं की समीक्षा
मंत्री अदिति तटकरे ने मंत्रालय में आयोजित बैठक में एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (Integrated Child Development Services Scheme) के तहत संचालित विभिन्न सेवाओं और उपक्रमों की समीक्षा की। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव डॉ. अनुप कुमार यादव (Dr. Anup Kumar Yadav), आयुक्त माधवी सरदेशमुख (Madhavi Sardeshmukh), सहसचिव वि. रा. ठाकूर (V. R. Thakur) और सहआयुक्त संगीता लोंढे (Sangeeta Londhe) सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मंत्री ने कहा कि पोषण आहार सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा है। इसलिए उसकी गुणवत्ता, सही स्थिति और लाभार्थियों के लिए स्वीकार्यता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। बच्चों का बेहतर पोषण और स्वास्थ्य एकीकृत बाल विकास सेवा योजना का प्रमुख उद्देश्य है। इसे हासिल करने के लिए पूरी व्यवस्था को सतर्क और सक्रिय रहना होगा।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर जांच जरूरी
मंत्री ने निर्देश दिया कि एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के आयुक्त भारतीय खाद्य निगम (Food Corporation of India-FCI) के अधिकारियों के साथ समन्वय कर पोषण आहार की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। यह आहार छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को दिया जाता है, इसलिए इसकी गुणवत्ता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। आंगनवाड़ी सेविकाओं को केंद्र पर पोषण आहार प्राप्त करते समय उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के बाद ही उसे स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं। टीएचआर (Take Home Ration-THR) प्राप्त होने के बाद उसका तत्काल लाभार्थियों में वितरण किया जाना चाहिए।
शिकायत पर तत्काल कार्रवाई
यदि लाभार्थियों की अनुपस्थिति के कारण पोषण आहार बच जाता है तो उसकी अवधि समाप्त होने से पहले उसका वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आहार की गुणवत्ता को लेकर शिकायत मिलने पर आंगनवाड़ी सेविका को मुख्य सेविका के माध्यम से परियोजना अधिकारी को इसकी जानकारी देनी होगी। शिकायत मिलने के बाद संबंधित परियोजना अधिकारी को तत्काल आंगनवाड़ी केंद्र का दौरा कर मामले की जांच करनी होगी। मंत्री ने अधिकारियों को शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
आपूर्तिकर्ताओं की भी जिम्मेदारी तय
मंत्री तटकरे ने पोषण आहार आपूर्तिकर्ताओं को भी निर्धारित समय पर गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। आपूर्ति से पहले आहार की जांच करने, उसे साफ करके और निर्धारित मात्रा में उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। एफसीआई (FCI) से प्राप्त अनाज को साफ करने के बाद पैक किया जाना चाहिए। किसी आहार को लेकर शिकायत मिलने पर आपूर्तिकर्ता को दो दिन के भीतर उसे बदलकर देना होगा। शिकायत की जांच के लिए आपूर्तिकर्ता को अपना प्रतिनिधि संबंधित आंगनवाड़ी केंद्र पर भेजना होगा और इसकी जानकारी आयुक्त कार्यालय को देनी होगी।
प्रोटीन और कैलोरी पर भी नजर
पोषण आहार की आपूर्ति के समय उसकी कम से कम 80 प्रतिशत अवधि शेष होनी चाहिए। इसके साथ ही टीएचआर (THR) में निर्धारित मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण आहार की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
पोषण आहार की गुणवत्ता जांच में लापरवाही नहीं चलेगी : मंत्री अदिति तटकरे

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