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जरांगे के कथित ऑडियो क्लिप पर महायुति सियासी भूचाल : शिवसेना ने CM देवेंद्र से की फॉरेंसिक जांच की मांग

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मुंबई: 500 करोड़ की सुपारी के आरोपों पर सबूत पेश करने की मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की चुनौती के जवाब में मराठा आंदोलनकारी मनोज जरांगे पाटिल ने गुरुवार को एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल की थी। जरांगे की उक्त ऑडियो क्लिप की वजह से अब राज्य की सत्तारूढ़ महायुति सरकार में भूचाल आ गया है।
शिंदे गुट के नेताओं ने मुख्यमंत्री फडणवीस से मिले
कथित ऑडियो क्लिप की साइबर सेल और फॉरेंसिक लैब से जांच कराने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने क्लिप में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे (Dr. Shrikant Shinde) के बारे में कथित टिप्पणियों, एक महिला की पहचान और कई नेताओं के नामों का उल्लेख होने की जांच कराने की मांग की। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने मामले की फॉरेंसिक और साइबर सेल के माध्यम से जांच कराने का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े नेता मनोज जरांगे पाटील (Manoj Jarange Patil) की ओर से प्रस्तुत की गई कथित ऑडियो क्लिप को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में शिवसेना (Shiv Sena) के शिंदे गुट के सांसदों, विधायकों और अन्य नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर जांच की मांग की। यह मुलाकात मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा बंगले (Varsha Bungalow) में हुई।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि कथित ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए। ज्ञापन के अनुसार, मनोज जरांगे पाटील ने छत्रपति संभाजीनगर (Chhatrapati Sambhajinagar) में आयोजित एक पत्रकार परिषद में यह क्लिप मीडिया के सामने पेश की थी। इसे अक्टूबर 2024 का बताया जा रहा है, हालांकि इसकी प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
क्लिप में 500 करोड़ रुपये का कथित उल्लेख
उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस कथित बातचीत को लेकर सवाल उठाए गए हैं कि क्या एकनाथ शिंदे के नाम पर भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party—BJP) से 500 करोड़ रुपये लिए जाने की बात कही गई थी। मनोज जरांगे पाटील ने भी इस संबंध में सवाल उठाए थे। हालांकि, कथित लेन-देन के आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है।
इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ महायुति (Mahayuti) गठबंधन के नेताओं ने जांच की मांग की है। शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि बातचीत वास्तविक है या उसमें किसी तरह की काट-छांट अथवा छेड़छाड़ की गई है। जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
कथित बातचीत में महिला की पहचान का सवाल
शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने कथित ऑडियो क्लिप में एक महिला की ओर से सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे के बारे में की गई टिप्पणियों की भी जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में सवाल उठाया गया है कि संबंधित महिला कौन है, उसने ये बातें किस आधार पर कहीं और क्या उसके पास अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी पता लगाने की मांग की है कि महिला को कथित जानकारी किसने दी और क्या डॉ. श्रीकांत शिंदे को जानबूझकर बदनाम करने की कोई कोशिश की गई थी। ये सभी सवाल प्रतिनिधिमंडल की ओर से उठाए गए हैं। महिला की पहचान और कथित बातचीत की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
भाजपा के दो विधायकों के नामों का उल्लेख
ज्ञापन में भाजपा के विधायक निरंजन डावखरे (Niranjan Davkhare) और विधायक प्रवीण दरेकर (Pravin Darekar) के नामों का भी उल्लेख किया गया है। शिवसेना के नेताओं ने मांग की है कि जांच के दौरान इन दोनों से भी पूछताछ की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित बातचीत में उनके नाम किस संदर्भ में आए और क्या उनका इस मामले से कोई संबंध है। इसके अलावा, कथित बातचीत में अतुल, निखिल, श्वेता जी, गिरीश, अजय जी, जितेनभाई और सुशीलकुमार पावरा जैसे नामों का उल्लेख होने की बात कही गई है। प्रतिनिधिमंडल ने इन व्यक्तियों की पहचान, उनकी राजनीतिक संबद्धता और मामले में उनकी संभावित भूमिका की जांच कराने की मांग की है। फिलहाल इन नामों के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता स्थापित नहीं होती।
साइबर सेल और फॉरेंसिक लैब से जांच की मांग
शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि कथित ऑडियो क्लिप को साइबर सेल और फॉरेंसिक प्रयोगशाला के पास भेजा जाए। जांच के दौरान यह पता लगाया जाए कि रिकॉर्डिंग असली है या नहीं, उसमें सुनाई देने वाली आवाजें किन लोगों की हैं और क्या ऑडियो में किसी तरह का संपादन या छेड़छाड़ की गई है।
ज्ञापन में जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों के आवाज के नमूने लेकर उनका मिलान करने की मांग भी की गई है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से और बिना किसी राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए। उसका कहना है कि यदि जांच में कोई व्यक्ति गलत बयान देने, ऑडियो से छेड़छाड़ करने या किसी साजिश में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर
प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संवेदनशील विषय का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। नेताओं ने आशंका जताई कि कथित बातचीत से समाज में भ्रम या तनाव पैदा हो सकता है। इसलिए इस पहलू की भी जांच की मांग की गई है।
ज्ञापन में महाराष्ट्र में सूखे जैसी परिस्थितियों, किसानों की समस्याओं और आम जनता को राहत देने की जरूरत का भी उल्लेख किया गया है। शिवसेना नेताओं ने कहा कि ऐसे समय में सामाजिक सौहार्द बनाए रखना महत्वपूर्ण है और मामले की निष्पक्ष जांच के जरिए तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल में ये नेता रहे शामिल
मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में विधान परिषद की उपसभापति सचिन अहिर (Sachin Ahir), सांसद मिलिंद देवरा (Milind Deora), सांसद रवींद्र वायकर (Ravindra Waikar), विधायक हेमंत पाटील (Hemant Patil), पूर्व सांसद एवं शिवसेना के महासचिव राहुल शेवाले (Rahul Shewale) और पूर्व मंत्री डॉ. दीपक सावंत (Dr. Deepak Sawant) शामिल थे।
राहुल शेवाले के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की फॉरेंसिक और साइबर सेल के माध्यम से जांच कराने का आश्वासन दिया है। अब जांच के जरिए कथित ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता, उसमें शामिल आवाजों और बातचीत के संदर्भ से जुड़े सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।

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